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: तत्कालीन भारतीय समाज का दर्पण है प्रेमचंद की रचनाएं- सुदामा राम गुप्ता" "व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने किया प्रेमचंद के कहानियों का पाठ"

Lohit Mandal / Thu, Aug 1, 2024 / Post views : 971

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बतौली:- उपरोक्त कथन शासकीय महाविद्यालय बतौली (सरगुजा) में 31 जुलाई 2024 को प्रेमचंद जयंती पर आयोजित व्याख्यानमाला में सरगुजिहा साहित्य के वरिष्ठ कहानीकार सुदामा राम गुप्ता ने कही। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य में तत्कालीन भारतीय समाज का प्रतिबिंब दिखाई देता है। उनके साहित्य में वर्णित घटनाएं एवं पात्र आज के समय में भी प्रासंगिक हैं। मुख्य वक्ता सुदामा राम गुप्ता ने अपनी सरगुजिहा कहानी "चिट्ठी" का वाचन भी किया। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता वरिष्ठ कहानीकार शशि मित्तल ने किया। विशिष्ट वक्ता के तौर पर उमेश गुप्ता एवं सुरेश जायसवाल मंचासीन रहे। व्याख्यानमाला का संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. गोवर्धन प्रसाद सूर्यवंशी ने किया। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानियों एवं उपन्यासों के महत्वपूर्ण संवाद एवं घटनाओं का पाठ करते हुए कहा कि प्रेमचंद के उपन्यासों में वर्णित ग्रामीण जीवन की सूक्ष्मता के कारण ही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने उनके उपन्यास "गोदान" को "कृषक जीवन का महाकाव्य" कहते हुए प्रेमचंद को "उपन्यास सम्राट" की उपाधि से विभूषित किया। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता कर रहीं शशि मित्तल ने प्रेमचंद जी के कहानी लेखन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी कहानियों में परिस्थितियों व कालक्रम के अनुरूप पात्रों का चयन एवं सूक्ष्मता से चित्रण लाजवाब था। उन्होंने "बूढ़ी काकी" कहानी में बुजुर्गों के प्रति भावों की व्याख्या करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बुजुर्गों की सही देखभाल और सेवा की सबसे अधिक आवश्यकता है। आधुनिक युग में सुखी जीवन के लिए दो रोटी और अच्छी नींद की आवश्यकता है जो बुजुर्गों के मेहनत मार्गदर्शन और आशीर्वाद से प्राप्त होता है। व्याख्यानमाला में अपने विचार रखते हुए सुभागी भगत ने कहा कि प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानियों में तत्कालीन जीवन का सूक्ष्म वर्णन मिलता है‌। प्रेमचंद की "सुभागी" कहानी का पाठ करते हुए उन्होंने कहा कि बाल विधवा सुभागी का अपने स्वयं के घर में इसलिए उपेक्षा किया जाता है कि वह एक लड़की है और ऊपर से विधवा भी परंतु वह मन लगाकर बीमार पिता की देखभाल और सेवा करती है और मृत्यु हो जाने पर एक पुत्र की तरह सभी रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार भी करती है। जिसमें तत्कालीन समाज में लड़कियों के प्रति भेदभावपूर्ण व्यवहार का वर्णन करते हुए नारी समस्या एवं वर्तमान समय में समाज के नारी की स्थिति पर कटाक्ष किया है। साक्षर भारत बतौली के परियोजना अधिकारी उमेश गुप्ता ने प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास "गोदान" के पात्रों की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे और बताया कि उनके पात्र एवं घटनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। आत्मानंद उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बतौली के शिक्षक सुरेश जायसवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किया। उक्ताशय की जानकारी देते हुए महाविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी प्रो. गोवर्धन सूर्यवंशी ने बताया कि प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन हिंदी विभाग एवं हिंदी साहित्य विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था‌। व्याख्यानमाला में महाविद्यालय के प्राचार्य बी. आर. भगत, प्रो. बलराम चंद्राकर, प्रो. तारा सिंह मरावी, प्रो. जिवियन खेस, श्रीमती सुभागी भगत, सुश्री मधुलिका तिग्गा, शिल्पी एक्का, राम प्रसाद राम, बसंत कुमार एवं अक्षय आनंद कच्छप सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। वाणिज्य विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रो. बलराम चंद्राकर ने व्याख्यानमाला के अंत में आभार व्यक्त किया।

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