Lohit Mandal / Thu, Jun 20, 2024 / Post views : 4481
पर जोर दिया तथा खेत पर पुआल को न जलाने की सलाह दी। प्रशिक्षण के दौरान मुख्य प्रशिक्षक डॉ. शमशेर आलम ने ग्रामीण महिलायों को मशरूम उत्पादन के बारे में बताया। डॉ. आलम ने विभिन्न प्रकार के मशरूम तथा उसमें लगने वाले कीट बीमारियों आदि की पहचान तथा प्रबंधन विषय पर प्रतिभागियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम का प्रयोग विभिन्न उत्पाद जैसे अचार, सूप, पापड़, बड़ी, खस्ता आदि मे किया जा सकता है। आर्थिक विश्लेषण के माध्यम से बताया गया कि मशरूम उत्पादन मे एक रुपये की लागत पर एक माह के अंदर लगभग 6-7 रुपये आमदनी प्राप्त की जा सकती है। डॉ. आलम ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मशरूम उत्पादन के सभी पहलुवो के बारे में बताया जायेगा तथा प्रशिक्षणार्थी को थ्योरी और प्रयोगिक के माध्यम से जानकारी दी जावेगी। कार्यक्रम में केंद्र के अन्य वैज्ञनिक प्रदीप लकडा] डॉ. सी. पी.राहंगडाले] डॉ. पुष्पेंद्र पैकंरा, डॉ. सूरज चंद्र पंकज एवं संतोष कुमार साहू भी उपस्थित रहे।विज्ञापन
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